..क्या करूँ..

जो भी है मन में..हाँ जो भी है मन में कह दो..

पेज

  • HOME
  • ये हैं मेरी कहानी
  • मेरी पंक्तियाँ

मेरी पंक्तियाँ

नहीं जानता मेरी इन पंक्तियों को कविता कहते हैं या नहीं..बस दिल करता है और कागज़ पर उतार देता हूँ भावनाओं को..

किताबें..
वो पुल..
वक़्त..
Golden time
कडवाहट..
विस्की..
इस दिल का क्या-करूँ..
उफ़ उनकी ये बेपरवाह नजरें..
वही चार लोग..कहने वाले...
ये कैसी क्यों है..
चुभन..
तुम हो पास मेरे
मरीचिका
एक कप काफ़ी..
तुम क्यों नहीं आते
रेतघड़ी
ठूंठ
ख़ामोशी
सांझ
मेरी तमन्ना













इसे ईमेल करेंइसे ब्लॉग करें! X पर शेयर करेंFacebook पर शेयर करेंPinterest पर शेयर करें
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें संदेश (Atom)
जिस हद तक तुम इस दुनिया में उलझे हो, उस हद तक तुम उसे खो देते हो। कलाकार दुनिया को छोड़ता है, ताकि उसे अपने कृतित्व में पा सके। तुम यथार्थ को अपने पास रखकर उसका सृजन नहीं कर सकते। तुम्हें उसके लिए मरना होगा, ताकि वह तुम्हारे लिए जीवित हो सके।

आपको क्या मैं पसंद आया...

क्या समझ पाओगे

SAKET SHARMA
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें

Old Memories

  • ▼  2016 (1)
    • ▼  दिसंबर (1)
      • कुछ भी कायम नहीं है, कुछ भी नहीं... ...और जो काय...
  • ►  2014 (4)
    • ►  जुलाई (1)
    • ►  मार्च (1)
    • ►  जनवरी (2)
  • ►  2013 (4)
    • ►  नवंबर (1)
    • ►  सितंबर (1)
    • ►  मई (1)
    • ►  फ़रवरी (1)
  • ►  2012 (14)
    • ►  दिसंबर (1)
    • ►  सितंबर (2)
    • ►  अगस्त (1)
    • ►  जून (2)
    • ►  मई (1)
    • ►  अप्रैल (3)
    • ►  फ़रवरी (1)
    • ►  जनवरी (3)
  • ►  2011 (5)
    • ►  दिसंबर (2)
    • ►  अगस्त (1)
    • ►  अप्रैल (2)
  • ►  2010 (7)
    • ►  दिसंबर (1)
    • ►  नवंबर (1)
    • ►  अक्टूबर (2)
    • ►  सितंबर (3)
  • ►  2009 (1)
    • ►  दिसंबर (1)
Text selection Lock by Hindi Blog Tips

कुल पेज दृश्य

लोकप्रिय पोस्ट

यात्रा थीम. Blogger द्वारा संचालित.