बुधवार, जनवरी 15, 2014
शनिवार, नवंबर 30, 2013
वो पुल..
वो पुल आज भी जहाँ का तहां खड़ा है,
किंकर्तव्यविमूढ़ की स्थिति लिए,
जैसे पहले हुआ करता था,
उस पुल पर जाने से आज भी जी घबराता है,
तमाम मजबूरियां गिना कर मैं उसे अकेले पुल पर छोड़ आया था,
वह मुझे जाते देखती रही,
शायद पुकारती तो रुक जाता,
नदी के उफान से शोर भी था,
मैं आज भी सोचता हूँ,
उसने मुझे पुकारा था की नहीं..
शनिवार, सितंबर 14, 2013
गुरुवार, मई 02, 2013
सोमवार, फ़रवरी 18, 2013
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